पंजीकरण फॉर्म (Registration form)

परतत्त्व चतुष्पाठी स्व-गतिक (सेल्फ-पेस्ड) भक्ति-शास्त्री कोर्स में आपका हार्दिक स्वागत करता है। कृष्णकृपामूर्ति श्री श्रीमद् ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद के निर्देशानुसार, इस्कॉन शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत इस्कॉन बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन के अधीन है यह कोर्स।

  • वर्ष के किसी भी समय प्रवेश
  • लंबे समय तक कक्षा में बैठने की आवश्यकता नहीं है
  • कक्षा की रिकॉर्डिंग अपनी सुविधानुसार सुनें
  • अपने समय पर पाठ्यक्रम समाप्त करें
  • ऑनलाइन परीक्षा

कोर्स पाठ्यक्रम : श्रीमद् भगवद्गीता यथारूप, श्रीभक्तिरसामृतसिन्धु (भूमिका से अध्याय 19 तक), श्रीईशोपनिषद्, श्रीउपदेशामृत।

पंजीकरण फॉर्म भरने के बाद प्रत्येक छात्र / छात्रा को एक मार्गदर्शक के अंतर्गत रखा जाएगा, जो परीक्षा, मूल्यांकन, आदि में छात्र / छात्रा की सहायता करेंगे।

कक्षा एवं मूल्यांकन पद्धति : इस स्व-गतिक कोर्स में, कक्षा पहले से रिकॉर्डेड होंगी। पंजीकरण के बाद छात्रों को कक्षा के लिंक प्राप्त होंगे। छात्रों को इन कक्षाओं को अपनी गति से सुनकर अपने मार्गदर्शक को इसकी पुष्टि करनी होगी। केवल तभी, छात्र एवं मार्गदर्शक दोनों की अपनी सुविधानुसार, व्यक्तिगत रूप से ऑनलाइन परीक्षा के लिए छात्र उपस्थित हो सकते हैं।

पाठ्यक्रम अवधि : पंजीकरण के समय से न्यूनतम 2 महीने की अवधि और अधिकतम 2 वर्ष की अवधि के भीतर छात्रों को पाठ्यक्रम पूरा करना होगा। यदि छात्र 2 वर्ष के भीतर पाठ्यक्रम पूरा करने में विफल रहता है, तो उसका पंजीकरण अमान्य हो जाएगा। यदि छात्र पाठ्यक्रम पुनः आरंभ करना चाहता है, तो उसे न्यूनतम 500 रुपये के शुल्क के साथ पुनः पंजीकरण करना होगा।

पात्रता :

  • कम से कम पिछले एक वर्ष या उससे अधिक समय से हरे कृष्ण महामन्त्र की कम से कम 16 माला जप।
  • कम से कम एक वर्ष या उससे अधिक समय तक चार नियामक सिद्धांतों (माँसाहार वर्जन, नशा वर्जन, जुआ वर्जन, अवैध संबंध वर्जन) का पालन।
  • पाठ्यक्रम खंड में उल्लिखित इन चार ग्रंथों का कम से कम एक बार अध्ययन।

परीक्षा तथा मूल्यांकन : तीन प्रकार की परीक्षा के आधार पर मूल्यांकन

  • बंद किताब परीक्षा (क्लोज्ड बुक असेसमेंट)
  • खुली किताब परीक्षा (ओपन बुक असेसमेंट)
  • श्लोक मूल्यांकन

बंद किताब परीक्षा और श्लोक मूल्यांकन वीडियो मीटिंग के माध्यम से मौखिक होंगे, तथा खुली किताब परीक्षा को लिखकर ईमेल या व्हाट्सएप के माध्यम से निर्दिष्ट मार्गदर्शक को भेजना होगा। यदि मार्गदर्शक और छात्र एक ही स्थान पर रहते हैं, तो बंद किताब परीक्षा लिखित रूप में भी लिया जा सकता है।

प्रश्नोत्तर : प्रश्न पूछने के लिए सभी छात्रों एवं मार्गदर्शकों के साथ एक अलग व्हाट्सएप ग्रुप होगा। हमारे शिक्षक एवं मार्गदर्शक वहाँ प्रश्नों का उत्तर लिखित या ध्वनि-रिकॉर्ड (वॉइस-नोट) के माध्यम से दे सकते हैं। चयनित पृष्ठों के उत्तर हम अपने यूट्यूब चैनल “Paratattva” पर वीडियो के माध्यम से देंगे और उन उत्तरों को आप “Bhakti-sastri QA” (भक्ति शास्त्री प्रश्नोत्तर) नामक प्लेलिस्ट में भी देख सकते हैं। साथ ही हमारी वेबसाइट पर एक पेज होगा जहाँ समय-समय पर प्रायः पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्नों को पोस्ट और अपडेट किया जाएगा।

समसामयिक बैठकें : कभी-कभी हम सभी छात्रों, मार्गदर्शकों और अतिथि शिक्षकों के साथ ऑनलाइन मिलन सत्र की व्यवस्था कर सकते हैं, जहाँ विशेष सेमिनार आदि होंगे।

श्लोक स्मरण सत्र : कभी-कभी हम कुछ ऑनलाइन सत्र भी आयोजित कर सकते हैं श्लोकों के स्मरण हेतु जहाँ हम छात्रों की सहायता करेंगे।

विशेष जानकारी : विशेष जानकारी के लिए, छात्र / छात्र पद्ममुख निमाइ दास से संपर्क कर सकते हैं। व्हाट्सएप : +91 8670767555। ईमेल: p.nimai.jps@gmail.com

कोर्स शुल्क : परतत्त्व चतुष्पाठी प्राइम सदस्य (मेंबर्स) के लिए निःशुल्क।

सदस्यता प्रक्रिया : एक बार न्यूनतम 15 डॉलर या 1000 रुपये के अनुदान से, 5 साल के लिए परतत्त्व चतुष्पाठी का सदस्य बना जा सकता है।

इस सदस्यता की विशेषताएं :

  • निःशुल्क भक्ति-शास्त्री
  • निःशुल्क भक्ति-वैभव
  • निःशुल्क इस्कॉन शिष्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रम
  • श्रील प्रभुपाद के ग्रंथों पर आधारित नि:शुल्क शास्त्रिक पाठ्यक्रम।
  • हमारे भाषा एवं कौशल विकास पाठ्यक्रमों पर विशेष छूट।

अनुदान प्रणाली :

Phone pay/Google pay/Paytm: +918670767555

Bank Transfer: PARESH ROY

ICICI Bank, Mayapur Bamanpukur Branch

Account No: 4024 01000 717

IFSC Code: ICIC0004024

Swift code: ICIC0004024

Whatsapp: +918670767555

विशेष सूचना : हम भक्तों को उनकी सुविधानुसार भक्ति-शास्त्री कोर्स करने की सुविधा देने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए हम आशा करते हैं कि छात्र 2 साल की अवधि के भीतर पाठ्यक्रम पूर्ण करने के लिए स्व-प्रेरित रहें तथा देर न करें। छात्र को परीक्षा मूल्यांकन पूर्ण करवाने के लिए या प्रेरणा देने की जिम्मेदारी मार्गदर्शक की नहीं है।

शिक्षक: पद्ममुख निमाई दास